कांपता सूरज , तलाशता है -
अलाव / कुछ इसी अंदाज में -
मानो ,कोई पदमनी
दर्पण तलाशती हो ,
या फिर -
न्याय , ढूंढ रहा हो
अपनी खोई / तुला
राजनीति के जंगल में
बेबस बिसुरता हुआ -
और / न्याय - मूर्ती ,
व्यस्त होँ
लेगपीस चबाने में ,
हलाल हो चुके /
न्याय का ,
क्योंकी ,मूर्ति पर सदा से -
चढ़ावा चढ़ाया जाता रहा है ,....
बेचारा सूरज ........
तलाश रहा है - अलाव ,
----- भोलानाथ त्यागी ,
49 /1 ,इमलिया परिसर
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मोबा - 09456873005
