Monday, September 7, 2015

लघु कथा

लघु कथा
भविष्य
‘देश के नौनिहालों से हमें बहुत आशायें है......शिक्षा के द्वारा चरित्र का विकास होता है, सत्य निष्ठा..... और नैतिकता द्वारा बच्चों में राष्ट्र प्रेम जागृत होता है..... इसी में देश का भविष्य सुरिक्षत है।’
राष्ट्रीय पर्व पर, एक शिक्षण संस्था में नेताजी, समारोहपूर्वक उवाच रहे थे। तालियों की गड़गड़ाहट से, आसमान गूंजने लगा। समारोह स्थल के बाहर, फटेहाल बच्चे सड़क पर पड़ा कचरा बीन रहे थे। उनकी आंखो में उतर आई भूख से, देश के सुंदर भविष्य की कल्पना धंुधला गई। उनकी ओर किसी का ध्यान नहीं गया था।
तभी, नैपथ्य में एक स्वर उभरा-
‘वाह, नेता जी..... आपका भविष्य तो कुर्सी में सुरक्षित है...... विदेशी बैंक खाते लबालब भरे हैं....... चरित्र और नैतिकता की दुहाई किस काम की........ देश का भविष्य आज भी कचरा बीन रहा है...... कभी देखा है, इस और भी......।
और यह स्वर श्रोताओं की कहीं गहरे तक मर्माहत कर गया।
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‘गुनाह’
तेज गर्मी पड़ रही थी। आंखों पर धूप का चश्मा, गरदन और गले में छिड़के गये पाउडर की रंगत सैन्ट और पसीने की मिली जुली गन्ध लिये, एक रूपसी खचाखच भरी सिटी बस में यात्रा कर रही थी। स्लीवलैस ब्लाउज पहले, अपना संतुलन बनाये रखने के लिये, बस की छत मे लगी राड़ को, हाथ से थाम रखा था। सभी यात्री चोर निगाहों से इस दृश्य के रसास्वादन में लीन थे।
स्टाप आने पर काफी परिश्रम के पश्चात , वह रूपसी बस की भीड़ से मुक्ति प्राप्त कर नीचे उतर पाई। कन्धे से झूलते बैग से , नीले रंग का प्रिन्टेड छाता निकाल कर , खोला और गन्तव्य की और कदम बढ़ाये।
तभी बस में बैठे एक युवा ने फिकरा कसा-‘........ वहा रे नीली छतरी वाले, तेरा भी जबाव नहीं.............।’
पास बैठे एक बर्जुग ने उसे लताड़ा था-‘........शर्म आनी चाहिए....... ऐसी छेड़-छाड़ तुम्हें शोभा नही देती....।’
युवा ने सफाई दी-.........बाबा ......शर्म किस बात की....... नीली छतरी वाले , भगवान को याद करना क्या गुनाह है?.......।’ तभी बस चल पड़ी थी।
बूढ़े बाबा, अपना सिर खुजला रहें थे।
----- भोलानाथ त्यागी
Mob ---- 09456873005
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